Jatmai Ghatarani Rajim

जतमई: गरियाबंद में रायपुर से 85 किमी की दूरी पर स्थित है। एक छोटा सा जंगल के खूबसूरत स्थलों के बीच सेट, जतमई मंदिर माता जतमई के लिए समर्पित है। मंदिर खूबसूरती से कई छोटे शिखर या टावरों और एक एकल विशाल टॉवर के साथ ग्रेनाइट के बाहर खुदी हुई है। मुख्य प्रवेश द्वार के शीर्ष पर, एक पौराणिक पात्रों का चित्रण भित्ति चित्र देख सकते हैं। जतमई की पत्थर की मूर्ति गर्भगृह के अंदर रखा गया है

यह घने जंगलों से ढंकी है और यहां कल-कल बहते पानी की आवाज सुनना बहुत ही सुकूनदायक लगता है। यहां कल कल करते झरने बरबस ही लोगो का मन मोह लेते है जतमई अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है प्रति वर्ष लाखो सैलानी यहाँ आते है । यहां का झरना प्रसिद्ध है जहाँ लोग अपने आप को इसमें भीगने से रोक नहीं पाते । जतमई प्रकृति की गोद में बसा है यहाँ आकर आप पर्वत चढ़ने का भी मज़ा ले सकते है।

घटारानी मंदिर : जतमई मंदिर से 25 किलोमीटर दूर स्थित एक बड़ा झरना हैं। जतमई मंदिर में ज्यादा उत्साह और भक्ति के साथ नवरात्रि पर्व मनाया जाता है, यहाँ नवरात्रि की तरह विशेष उत्सव के मौकों पर एक सजावट देखतें बनता है। मानसून के बाद यह यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय है। मंदिर के निकट सुंदर झरना बहती है, जो इस जगह को और अधिक आकर्षक बना देता है झरना इस गंतव्य को पूरे परिवार के लिए एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बनाने पूर्ण प्रवाह में है। झरना मंदिर में प्रवेश करने से पहले एक डुबकी लेने के लिए सबसे अच्छी जगह है कि एक प्राकृतिक पूल में डालता है। अधिक साहसी जंगल में एक वृद्धि ले सकते हैं। आसानी से सुलभ, वाहनों रायपुर से जतमई मंदिर के लिए उपलब्ध हैं।

ं नशे की बढ़ती नशा, एक ऐसी बीमारी है जो कि युवा पीढ़ी को लगातार अपनी चपेट में लेकर उसे कई तरह से बीमार कर रही है। शराब, सिगरेट, तम्‍बाकू एवं ड्रग्‍स जैसे जहरीले पदार्थों का सेवन कर युवा वर्ग का एक बड़ा हि‍स्सा नशे का शिकार हो रहा है। आज के समय में फुटपाथ और रेल्‍वे प्‍लेटफार्म पर रहने वाले बच्‍चे भी नशे की चपेट में आ चुके हैं। लोग सोचते हैं कि वो बच्‍चें कैसे नशा कर सकते है जिनके पास खाने को भी पैसा नहीं होता। परंतु नशा करने के लिए सिर्फ मादक पदार्थो की ही जरुरत नहीं होती, बल्कि व्‍हाइटनर, नेल पॉलिश, पेट्रोल आदि की गंध, ब्रेड के साथ विक्स और झंडु बाम का सेवन करना, कुछ इस प्रकार के नशे भी किए जाते हैं, जो बेहद खतरनाक होते हैं। नशे की लत ने इंसान को उस स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है कि अब व्‍यक्‍ति मादक पदार्थों के सेवन के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, वह नशे के लिए जुर्म भी कर सकता है। नशे के मामले में महिलाएं भी पीछे नहीं है। महिलाओं द्वारा भी मादक पदार्थों का बहुत अधिक मात्रा में सेवन किया जाता है। व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में तनाव, प्रेम संबंध, दांपत्य जीवन व तलाक आदि कारण, महिलाओं में नशे की बढ़ती लत के लिए जिम्मेदार है। जानिए नशे के प्रकार - यह जरुरी नहीं है कि नशा सिर्फ मादक पदार्थों का सेवन कर ही किया जाए, नशा किसी भी प्रकार का हो सकता है। जानिए नशे के विभिन्न प्रकार - 1. मादक पदार्थों का सेवन - मादक पदार्थों के सेवन में शराब, सिगरेट, ड्रग्‍स, हेरोइन, गांजा, भांग आदि शामिल हैं। 2. अन्‍य - शोधकर्ताओं के अनुसार हर वह चीज जो आपको जिसकी आपको लत लग जाए, नशे की श्रेणी में ही आता है। ऐसी ही कुछ आदतें हैं जिन्हें छोड़ना बेहद मुश्किल होता है जैसे - मादक पदार्थों के अलावा चाय, काफी, वर्तमान समय के नवीन यंत्र जैसे - विडियो गेम्‍स, स्‍मार्ट फोन, फेसबुक आदि का ज्‍यादा मात्रा में उपयोग भी नशे की श्रेणी में आते है। नशे का युवा वर्ग पर प्रभाव - वर्तमान में सबसे ज्‍यादा नशा युवा पीढ़ी कर रही है। युवा, जिसके हाथ में देश का भविष्य है वही नशे में बर्बाद हो रहा है। युवाओं में नशा करने की वजह उनकी बढ़ती उम्र के शौक होते हैं, कुछ युवा परिवार की विपरीत परिस्‍थितियों के कारण भी नशा करने पर मजबूर हो जाता है, कुछ लोग मानसिक तनाव से भी ग्रसित होकर नशा करते हैं या उनके माता-पिता उन्‍हें समय नहीं देते। कुछ ऐसे कारणों से भी युवा वर्ग नशे की चपेट में आ जाता है। युवाओं की नई उम्र के जोश में युवा नशे के लिए कुछ भी कर सकता है। वह अपराध करने से भी नही चुकता है। नशे से हानियां - 1. मादक पदार्थों के सेवन का सबसे बड़ी हानि, स्वास्थ्य की हानि है। इससे आपके शरीर के कई अंगों पर एक साथ विपरीत असर पड़ता है। खास तौर से यह आपके दिमाग को भी अपनी चपेट में ले लेता है। 2. नशा करने वाला व्‍यक्‍ति हमेशा चिढ़ा हुआ और मानसिक तनाव से ग्रसित होता है। 3. नशा करने वाला व्‍यक्‍ति सदैव अपने ख्‍यालों में ही रहता है, उसे अपने आस-पास के माहौल से ज्‍यादा मतलब नहीं होता है। 4. नशा करने वाला व्‍यक्‍ति आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक सभी से कमजोर होता है। 5. नशा करने वाला व्‍यक्‍ति अपने समाज एवं परिवार से बिलकुल दूर हो जाता है। 6. नशा करने वाला व्‍यक्‍ति सबसे ज्‍यादा दुर्घटनाओं का शिकार होता है। नशा मुक्‍ति के उपाय - 1. सरकार द्वारा भारत के सभी राज्‍यों में नशा मुक्‍ति केन्‍द्र खुलवा दिए गए हैं, जो नशे से छुटकारा पाने के लिए बहुत उपयोगी है। 2. होम्‍योपैथी का इलाज नशा मुक्‍ति के लिए अच्‍छा उपाय है। 3. नशा मुक्‍ति के लिए किसी काउंसलर की सलाह लेना युवा वर्ग के लिए सही उपाय है। 4. नशा मुक्‍ति के लिए आयुर्वेद में भी बहुत से उपाय है जो सफल हुए हैं, इन्हें अपनाया जा सकता है।

Patal Bhairvi Temple,Rajnandgaon

Barfani dham is a temple in the town of Rajnandgaon in Chhattisgarh. A large Shiva Linga can be seen at the top of the temple while a large Nandi statue stands in front of it.The temple is constructed in three levels. The bottom layer is the shrine of Patal bhairavi, the second is the Navadurga or Tripura Sundari shrine and the upper level is of Shiva.

 छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में देवी का एक ऐसा मंदिर हैं जहां प्रसाद के रूप में खीर दी जाती है। इस खीर के बारे में कहा जाता है कि इसे खाने से भक्तों के कई तरह की बीमारियों से ढुटकारा मिल जाता है। दरअसल प्रसाद के लिए बनने वाली इस खीर को बनाने का एक अलग ही तरीका है। जानिए इस मंदिर के बारे में...
- राजनांदगांव राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस मंदिर में छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से लोग दर्शन करने और खासकर माता का प्रसाद लेने आते हैं।
- ये मंदिर है पाताल भैरवी की जिनकी प्रतिमा जमीन से 16 फीट नीचे है।
- रौद्र रूप में ये प्रतिमा 15 फीट ऊंची और 11 टन वजनी है। यहां नवरात्रि में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है।
प्रसाद में डाली जाती है जड़ी-बूटी
- यहां पहाड़ों पर उगने वाली खास जड़ी-बूटी डालकर खीर बनाई जाती है।
- यही खीर लोगों को प्रसाद के रूप में बांटी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस खीर को खाने से दमा, अस्थमा और श्वांस से जुड़ी कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
- इसलिए यहां इन मर्जों से पीड़ित श्रद्धालुओं की हजारों में रहती है।
पुराणों की मान्यताओं पर बना है ये मंदिर
- ये मंदिर पुराणों के आधार पर बनाया गया है। जमीन के नीचे गर्भगृह में मां पाताल भैरवी की प्रतिमा है।
- पौराणिक मान्यताओं के आधार पर ही हनुमान जी और भैरव बाबा की प्रतिमा भी विराजित की गई है।
- सिद्ध पीठ के दूसरे तल में देवी लोक बनाया गया है जहां दश महाविद्या स्थापित हैं।
Maa Patal Bhairavi Temple,Barfani Dham,Rajnandgaon(Chhattisgarh)

How to Reach 

By Train
There are regular trains from other major cities (like New Delhi,Mumbai, Kolkata, Chennai, Banglore, Ahmedabad, Raipur etc) of the country to Rajnandgaon. Railway Station name is - Raj Nandgaon(RJN) .
By Air
The nearest Airport is Just 72 kms away from the city is Swami Vivekananda International Airport, Raipur, Chhattisgarh.

By Road

Rajanandgaon city is connected to the National Highway. This city is located on NH 6. It is 72 kms away from Chhattisgarh’s capital Raipur and is 212 kms away from Nagpur(Maharashtra).

माँ पाताल भैरवी राजनांदगाव में जवारा विसर्जन का अद्भुत दृश्य ज़रूर देखे और शेयर करे । माँ आप सभी की मनोकामना पूरी करे |

Song- TOR CHARAN PAKHARI LETENV DAI

Song - Mahamai ke bidai,Singer - Kantikartik Yadav, Lyrics - Mauni Lala (Jevartala) Direction - Tirath Yadav (BOB Raipur) Music - OP Dewangan, Post Production - KOK Cratiaon & Team Rajnandgaon

Pragyagiri Tirth,Dongargarh

Pragya giri is an area of Dongargarh in the Rajnandgaon district of the Indian state of Chhattisgarh situated on a hilltop of 1,000 feet (300 m). There is a Buddh vihara with a large Buddha statue facing east. There are 225 steps leading up the mountain.Construction of Pragyagiri was done in 1998 by Pujya Bhadant Sangharatna Manake k (President Pannya Metta Sangha India).Dhamma work is continuing on Pragyagiri Dongargarh from Pannya Metta sangha India In since 1991. The first International Buddhist Conference was held on 6 February 1992 by Pujya Bhadant Sangharatna Manake (President's Message Mata Sangha). So far, 25 international Buddhist conferences have been organized by the Pannya Metta Sangha.

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प्रज्ञा गिरि भारतीय राज्य छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ का एक क्षेत्र है जो 1,000 फीट (300 मीटर) की पहाड़ी पर स्थित है। वहाँ एक बौद्ध विहार है जिसमें पूर्व की ओर एक बड़ी बुद्ध प्रतिमा है। पहाड़ पर ले जाने वाले 225 कदम हैं। प्राग्यगिरि का पुनर्निर्माण 1998 में पूज्य भदंत संघरत्न मानेक के द्वारा किया गया था। सम्मेलन 6 फरवरी 1992 को पूज्य भदंत संघारत्न मानेक (राष्ट्रपति के संदेश माता संघ) द्वारा आयोजित किया गया था। अब तक, 25 अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलनों का आयोजन पन्न्या मेट्टा संघ द्वारा किया गया है।

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360 Degree Images

A panoramic view is also purposed for multi-media, cross-scale applications to an outline overview (from a distance) along and across repositories. This so-called “cognitive panorama” is a panoramic view over, and a combination of, cognitive spaces used to capture the larger scale.

The Taj Mahal is an ivory-white marble mausoleum on the south bank of the Yamuna river in the Indian city of Agra. It was commissioned in 1632 by the Mughal emperor, Shah Jahan, to house the tomb of his favourite wife, Mumtaz Mahal. It also houses the tomb of Shah Jahan, the builder.