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पद्म विभूषण तीजन बाई (Biography)- Success Story by Teejan bai ji

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पद्म विभूषण तीजन बाई (Biography)- Success Story by Teejan bai ji

Folk Singer Teejan Bai

13 साल की उम्र में उसने अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन 10 रुपये में एक पड़ोसी गाँव चंद्रखुरी (दुर्ग) में दिया एक महिला के लिए पहली बार ‘पंडवानी’ के कपालिक शिलि (शैली) में गाते हुए जैसा कि पारंपरिक रूप से महिलाएँ गाती थीं। वेदमती में- बैठी हुई शैली। परंपरा के विपरीत तीजन बाई ने अपनी विशिष्ट कण्ठस्थ स्वर और अचूक वाणी में ज़ोर से गायन का प्रदर्शन किया जो उस समय तक दर्ज था जो एक नर गढ़ था। थोड़े समय के भीतर उसे आस-पास के गाँवों में जाना जाने लगा और विशेष अवसरों और त्योहारों पर प्रदर्शन के लिए निमंत्रण मिलता था।

Teejan Bai was born in Ganiyari village 14 kilometres (8.7 mi) north of Bhilai to Chunuk Lal Pardhi and his wife Sukhwati. She belongs to the Pardhi Scheduled Tribe of Chhattisgarh state. The eldest among her five siblings she heard her maternal grandfather Brijlal Pradhi recite the Mahabharata written by Chhattisgarhi writer Sabal Singh Chauhan in Chhattisgarhi Hindi and instantly took a liking to it. She soon memorised much of it and later trained informally under Umed Singh Deshmukh. Awarded by – Sangeet Natak Akademi Award in 1995 Padma Shri- 1988 Padma Bhushan- 2003 Padma Vibhushan- 2019 Genius Book of World Record

तीजन बाई की बायोपिक का आइडिया ऐसे समय में सामने आया है जब उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। जिसमें से एक है 2018 में उन्हें दिया गया द फुकुओका प्राइज। इस फिल्म की मेकिंग में आलिया सिद्दीकी और मंजू गढ़वाल की मदद कर रहे नवाजुद्दीन कहते हैं- तीजन बाई अपने आप में एक किवदंती हैं। मुझे आलिया पर? पूरा यकीन है कि वे इस फिल्म को महज फिल्म फेस्टिवल के लिए नहीं, बल्कि आज के आम? दर्शकों को ध्यान में रखकर इसे बेहद प्रासंगिकता के साथ बनाएंगी।

  • लोक गायन कला पंडवानी में थी महारत

तीजन बाई को लोक गायन की मशहूर कला पंडवानी में महारत हासिल है। पंडवानी छत्तीसगढ़ में सुनाई जाने वाली महाभारत से जुड़े किस्सों से संबंधित गायन विधा है। तीजन बाई की इसी कला ने आलिया सिद्दीकी को बेहद प्रभावित किया। उन्हें लगा कि एक बायोपिक उनकी जिंदगी के साथ न्याय कर पाएगी। इसलिए स्क्रिप्ट लिखने का जिम्मा भी आलिया ने खुद ही उठाया। आलिया चाहती हैं कि फिल्म के तमाम गाने एक ऐसे कद्दावर शख़्स ने लिखे जिसे कलम का जादूगर माना जाता है। आलिया की दिली ख़्वाहिश है कि गुलजार साहब तीजन बाई पर बन रही फिल्म के गाने लिखकर उनकी जिदगी को अपने लिखे शब्दों से हमेशा के लिए अमर कर दें।

छत्तीसगढ़ के गनियारी गांव में 1956 में जन्मीं तीजन बाई के पिता का नाम चुनुक लाल पारधी और मां का नाम सुखवती था। छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति पारधी समाज से ताल्लुक रखने वाली तीजन बाई को 1988 में पद्मश्री, 1995 में श्री संगीत कला अकादमी पुरस्कार, 2003 में डॉक्टरेट की डिग्री, 2003 में पद्म भूषण, 2016 में एमएस सुब्बालक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

तीजन बाई की शादी 12 साल की बेहद कम उम्र में कर दी गई थी। उन्हें अपने पारधी समाज से निष्काषित भी कर दिया गया था। उनका कसूर बस इतना था कि वे एक महिला होकर पंडवानी गायिकी की विधा में बेहद रुचि रखती थीं। इस तरह से बचपन से ही उनका संघर्ष शुरू हो गया था। वे एक झोपड़ी बनाकर रहती थीं। आलिया सिद्दीकी कहती हैं कि उन्होंने कभी भी गायिकी का दामन नहीं छोड़ा और इसी गायिकी के चलते उन्हें लोकप्रियता मिली। तीजन बाई की जिंदगी के कई पहलू हैं, जिसके बारे में लिखा जा सकता है। मुझे शिद्दत से लगा कि उनकी जिंदगी पर एक फिल्म बनाई जानी चाहिए।

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