History of folk geet Pandavani

The journey of Pandwani to become an established iconography and the contribution of women Kathagayakas in it was not that easy. It is true that the Gond tribe of Mandla district has a tradition of singing Gondwani and their Pandwani tale is completely different from the Kaurava-Pandava story of Mahabharata practiced in the main Hindu stream. But his traditional Gondwani tale has become extinct in the present day Gonds of Chhattisgarh. Mahabharata Katha characters especially Bhima, Draupadi and Karna are extremely popular in the tribal and rural areas of Chhattisgarh. The legends and folk tales related to them are in vogue. In some villages, there are also stories of Bhima's footprints or remains of his other signs. But he did not have the overall Pandavani form that emerged in the mid-twentieth century.

Jhaduram Devangan,Pandavani
Jhaduram Devangan,Pandavani

पंडवानी के एक स्थापित कालरूप बनने और उसमें महिला कथागायकों के योगदान की यह यात्रा उतनी आसान नहीं थी। यह सच है कि मंडला जिले की गोंड जनजाति में गोंडवानी गाने की परंपरा रही है और उनकी पंडवानी कथा , मुख्य हिन्दू धारा में प्रचलित महाभारत की कौरव -पांडव कथा से सर्वथा भिन्न है। परन्तु वर्तमान छत्तीसगढ़ के गोंडों में उनकी पारम्परिक गोंडवानी कथा विलुप्त हो चुकी है। समूचे छत्तीसगढ़ के आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में महाभारत कथा के पात्र विशेषतः भीम , द्रोपदी और कर्ण अत्यंत लोकप्रिय हैं। इनसे सम्बंधित किवदंतियां एवं लोक कथाएं प्रचलन में हैं। कुछ गांवों में भीम के पैरों के निशान अथवा उसके अन्य चिन्हों के अवशेषों की दन्तकथें भी सुनने में आती हैं।परन्तु उनका कोई वह समग्र पंडवानी स्वरूप नहीं था जो बीसवीं सदी के मध्य में उभर कर सामने आया।

Teejan Bai Pandavani Folk Singer

Earlier, in folk dramas, men used to wear female forms and used to act and dance to female papers. The same situation was there in Chhattisgarh. Till 1927-28, there was no organized dance troupe in Chhattisgarh. Dau Mandraji created the first systematic dance troupe in 1927-28 and around 1930 he started using harmonium in the dance. In the 1980s, Dau Mandraji of Raveli village near Rajnandgaon encouraged women of Dewar caste to perform on the stage in his Nacha Mandali. Dewar is a nomadic community of Chhattisgarh that performs begging and singing. This was the first time in Chhattisgarh when a woman performed on stage. His use was expanded by noted theater artist Habib Tanveer when he presented Fida Bai Dewar, Vasanti Dewar and Padma Dewar on stage in his famous drama Charandas Chor. Habib Tanvir brought fame and honor to the dance artists of Chhattisgarh, including the women of Devar, overnight.

Ritu Verma Pandavani Folk Singer
Ritu Verma Pandavani Folk Singer

पहले तो लोक नाटिकाओं में पुरुष ही नारी रूप धारण करके स्त्री पत्रों का अभिनय एवं नृत्य-गान करते थे। छत्तीसगढ़ में भी यही स्थति थी। सन् 1927-28 तक छत्तीसगढ़ में कोई भी संगठित नाचा मंडली नहीं थी । दाउ मंदराजी नें 1927-28 में पहली व्यवस्थित नाचा मंडली बनाई और सन १९३० के आस -पास उन्होंने नाचा में हारमोनियम का प्रयोग आरंभ किया। सन १९६० के दशक में राजनांदगांव के निकट रवेली गांव के दाऊ मंदराजी ने अपनी नाचा मंडली में देवार जाति की महिलाओं को मंच पर नाचा प्रस्तुति हेतु प्रोत्साहित किया। देवार छत्तीसगढ़ का एक घुमक्क्ड़ समुदाय है जो गायन -वादन कर भिक्षावृति करता है। छत्तीसगढ़ में यह पहला अवसार था जब मंच पर किसी महिला ने प्रस्तुति दी थी। उनके इस प्रयोग का विस्तार प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने किया जब उन्होंने फ़िदा बाई देवार ,वासंती देवार और पद्मा देवार को अपने प्रसिद्ध नाटक चरणदास चोर में मंच पर प्रस्तुत किया। हबीब तनवीर ने छत्तीसगढ़ के नाचा कलाकारों जिनमें देवार महिलाऐं भी सम्मिलित थीं, को रातों -रात ख्याति और सम्मान दिला दिया।

प्रभा यादव, चंदखुरी , रायपुर
प्रभा यादव, चंदखुरी , रायपुर

Born, illiterate or semi-educated, women artists considered low castes, the courage and commitment with which they have faced inequalities like social bonds, family difficulties, is commendable. Religious story singing or reading is generally considered to be the work of men, but the peak of popularity reached by women story singers in Chhattisgarh is unique.

 कुमारी निषाद, अखलोद दीघ , दुर्ग , छत्तीसगढ़
कुमारी निषाद, अखलोद दीघ , दुर्ग , छत्तीसगढ़
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