Jatmai 360 Tour Gariyaband

जतमई मंदिर-
गरियाबंद में रायपुर से 85 किमी की दूरी पर स्थित है। एक छोटा सा जंगल के खूबसूरत स्थलों के बीच सेट, जतमई मंदिर माता जतमई के लिए समर्पित है। मंदिर खूबसूरती से कई छोटे शिखर या टावरों और एक एकल विशाल टॉवर के साथ ग्रेनाइट के बाहर खुदी हुई है। मुख्य प्रवेश द्वार के शीर्ष पर, एक पौराणिक पात्रों का चित्रण भित्ति चित्र देख सकते हैं। जतमई की पत्थर की मूर्ति गर्भगृह के अंदर रखा गया है।

माता जतमई को समर्पित इस अद्भुत मन्दिर की बहुत अधिक मान्यता है। अत्यंत आश्चर्यजनक बात यह कि जतमई पहाड़ी 200 मीटर क्षेत्र में फैली हुई है और 70 मीटर ऊँची है, और इसी पहाड़ी पर जतमई घटारानी का मंदिर ऊँचे जलप्रपात के किनारों पर स्थित है। यहाँ शिखर पर विशालकाय पत्थर एक-दूसरे के ऊपर इस प्रकार सटे हुए हैं, जैसे किसी शिल्पकार के द्वारा जमाये गये हों। घटारानी प्रपात तक पहुँचना आसान नहीं है, अतः पर्यटकों के लिए वहाँ तक पहुँचने के पर्याप्त साधन जुटाए गए हैं। मन्दिर अत्यंत सावधानी और ख़ूबसूरती से जलप्रपात के समीप प्रकृति की गोद में, पटेवा के समीप ग्रेनाइट के बहुत-से छोटे शिखरों और एक बहुत ही विशाल शिखर में खुदा हुआ है।

घटारानी के समीप ही एकमुखी तिरछा शिवलिंग स्थापित है, जिसे ‘टानेश्वरनाथ महादेव’ कहा जाता है और जिसके दर्शन करने के लिए यहाँ भक्तगण लालायित रहते हैं। इस शिवलिंग के बारे में एक पौराणिक कथा प्रसिद्ध है – कहा जाता है कि फिंगेश्वर के मालगुजार इसे अपने साथ ले जाना चाहते थे, लेकिन वे जितनी खुदाई करते शिवलिंग और गहरा होता चला जाता, आखिरकार थक-हारकर उन्होंने वह शिवलिंग वहीं छोड़ दिया। तभी से यह शिवलिंग टेढ़ा है।

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यह घने जंगलों से ढंकी है और यहां कल-कल बहते पानी की आवाज सुनना बहुत ही सुकूनदायक लगता है। यहां कल कल करते झरने बरबस ही लोगो का मन मोह लेते है जतमई अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है प्रति वर्ष लाखो सैलानी यहाँ आते है ।और पिकनिक का लुफ्त उठाते है यहां का झरना प्रशिद्ध यही लोग अपने आप को इसमें भीगने से रोक नहीं पाते । जतमई प्रकृति की गोद में बसा है यहाँ आकर आप पर्वत चढ़ने का भी मज़ा ले सकते है।

जतमई मार्ग पर और भी पर्यटक स्थल है यहाँ पास में छोटा सा बांध है यह पिकनिक स्पॉट भी है, जहां आप नहाने का भी मजा ले सकते हैं।

पटेवा के निकट स्थित जतमई पहाड़ी एक २०० मीटर क्षेत्र में फैला पहाड़ है, जिसकी उंचाई करीब ७० मीटर है. यहां शिखर पर विशालकाय पत्थर एक-दूसरे के ऊपर इस कदर टिके हैं, जैसे किसी ने उन्हें जमाया हो. जतमई में प्रमुख मंदिर के निकट ही सिद्ध बाबा का प्राचीन चिमटा है, जिसके बारे में किवंदती है कि यह १६०० वीं शताब्दी का है. बारिश के दिनों झरनों की रिमझिम फुहार इसे बेहतरीन पिकनिक की जगह बना देता है , यहाँ पर्यटक नहाने का बहुत आनंद उठाते हैं|

जतमई और घटारानी छत्तीसगढ़ के दो खूबसूरत जलप्रपात हैं, जो बरसात के मौसम में देखते ही बनते हैं। धार्मिक आस्था वाले लोगों के लिए यह तीर्थ भी है। यहां देवी मंदिर के साथ शिवलिंग भी है,यहां पहुंचने के लिए पक्की सड़कें हैं

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