11वीं सदी की सभ्यता के रहस्य यहाँ दफन है (छत्तीसगढ़ का मदकू द्वीप)

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Secrets of 11th century civilization are buried here (Madku island of Chhattisgarh)

ऐसी मान्यता है कि मंडूक ऋषि ने यहीं पर मंडूकोपनिषद की रचना की थी. उन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम मंडूक पड़ा. यहां खुदाई में कुछ ऐसे अवशेष मिले हैं, जो 11वीं शताब्दी के कल्चुरी कालीन मंदिरों की श्रृंखला से मिलते-जुलते हैं| 

छत्तीसगढ़ के  इतिहास पर नज़र डाले तो  कई रोचक जानकारी प्राप्त होती है | सरगांव के पास बिलासपुर जिले के बैतलपुर से चार किलोमीटर पहले इस नदी ने उत्तर एवं उत्तर पूर्व दिशा में दो धाराओं में बंटकर एक द्वीप का निर्माण किया है, यही  मदकू द्वीप के नाम से प्रसिद्ध है।

मदकू द्वीप आम तौर पर जंगल जैसा है जोकि शिवनाथ नदी के पानी से घिरा हुआ, मुंगेली जिले में स्थित है । शिवनाथ नदी की जलधारा ने मदकू द्वीप को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक हिस्सा लगभग 35 एकड़ में है, जो अलग-थलग हो गया है। दूसरा करीब 50 एकड़ का है, जहां 2011 में उत्खनन से पुरावशेष मिले हैं।

यहाँ मुख्य द्वार से अंदर पहुंचते  पहले धूमेश्वर महादेव मंदिर और फिर श्रीराम केवट मंदिर आता है। श्री गणेश और श्री हनुमान के प्राचीन मंदिर और थोड़ी दूर पर ही श्री राधा कृष्ण मंदिर भी हैं।

It is believed that the sage Mandook created the Mandukopanishad here. The place was named Mandook after him. Some such remains have been found in the excavations here, which are similar to a series of 11th century Kalchuri carpet temples. If you look at the history of Chhattisgarh, you get many interesting information. Four kilometers before Baitalpur in Bilaspur district near Sargaon, this river has formed an island by dividing it in two streams in the north and north east direction, which is also known as Madku Island.

India Tourism

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